लेखनी कहानी -11-Mar-2024
जो भी कुछ हैं मन में प्रस्फुटित कर दो
खुल कर बोलो या पत्र में लिख दो
क्यों बात बात में मौन हो जाती हो
मन में है कुछ तो बम सा विस्फोट कर दो।।
समय आ गया है खुल के कहना
कुछ बिंदु इंगित हाइलाइटर से कर देना
ऐसे तो स्तब्ध रहते ही हैं हम
कहीं तुम अब अदाओं की बिजली गिरा कर पागल ना कर देना।।
मन भावन तरीके से रंग बिरंगी दुनिया को सजाना
जुल्फों के साए में सुला कर मेरी ख्याल रखना
तुम तो जानती ही हो मुझे और गहराई से जान लेना
अंधेरे में यु ना तुम तिर चलाना।।
मंजिल तो एक ही है चाहे किसी रास्ते से जाना
मिलेगें वही तुम देख लेना
हैं मुरीद कुछ लोग तुम्हारी नयन की
इसीलिए नयन को जरा ख्याल बात से कहीं टिकाना।।
यह अजनबी समय से पीछा छुड़ाना
तुम कह दो इश्क न हैं तो मिट जाना
काहे के लिए करेंगे इंतजार तुम्हारी
हमारा होगा किसी और सड़क से आना जाना।।
फ़ालतू का दौड़म दौड़ से हमें बचाना
मन मंदिर में बसे हैं जो श्याम उसी कि राधिका बन जाना
ज्यादा इमोश्नल कर के ना
अब किसी और ब्लैकमेल करना
अपने अदाओं की बिजली को जरा संभाल कर रखना।।
इतने कम नहीं है क्या
जो दिन में तारे दिखाना
मैडम चांद सी सुरत को
अब हमें दुबारा ना दिखाना।।
बार बार न अंगुली की पैड़ पर जाए
तुम अपनी नंबर बदल लेना
स्क्रीन पर जो लगाईं हो ना मेरा फोटो
अपने हाथों से मिटा देना।।
तबीयत खुश हो जाएंगी
कभी दिख जाए तो मुस्कुरा देना
हया की बिजली अभी जो गिराती हो
तभी मत गिराना जीवन शांति से जीने देना।।
बात तो बहुत हुईं
अब साथ नहीं तो बातों को बंद कर दो
इर्द-गिर्द पिंड सा घुमती तस्वीर रहम कर दो
तरस खाना ऐ भगवान हमारी जवानी पर
फिर और को ज़हन में ना उतार देना।।
प्रेम व्यथा में न डुबें
कल्पित चेहरों पर दया दिखाना
संदीप धिरज मत खो संयम रख
रस्ता बंद थोड़ी हुईं हैं एक गईं तो दूसरे से हाथ मिलाना।।
संदीप कुमार अररिया बिहार
Mohammed urooj khan
13-Mar-2024 04:10 PM
👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾
Reply
Gunjan Kamal
12-Mar-2024 11:58 PM
बहुत खूब
Reply
Punam verma
12-Mar-2024 09:04 AM
Nice👍
Reply